
नही तो तुम्हारी उम्मीदे बेवजह बढ़ जाएगी।

कदम मंज़िल तक ज़रूर पहुच जाएंगे।

मगर लोग ये नही समझते इसलिए चलते चलते रुक जाते है।

अब जिसको शिकायत है वो अपना रास्ता बदले”

कुछ आपका रास्ता साफ करने भी आते हैं”

जबकि इन्सान छोटा होकर भी
अपनी हद भूल जाता है”

असीमित अर्थ हो लेकिन इतना ही हो
कि शब्दों से किसी को कष्ट न हो

दोस्तों गौर से देखना वो मुस्कुराते बहुत है”

मेरी फितरत में तो गैरों पर भी भरोसा करना था! ?

रूबरू तो महज दिखावा किया जाता है।
